संघ प्राकट्य एवं संत निर्वाण दिवस

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संघ–प्राकट्य एवं संत निर्वाण दिवस दिनाकं २१ दिसम्बर २०१५ (मोक्षदा एकादशी एवं गीता जयंती) के पुण्य–पर्व पर मानव सेवा संघ के केन्द्रीय आश्रम–वृन्दावन में उत्साह एवं श्रद्धापूर्वक मनाया गया। प्रातः ८.३० बजे सभी आगन्तुक भक्तवृंद एवं आश्रमवासी साधक भाई–बहनों ने संघ के संस्थापक की महासमाधि स्थल पर एकत्रित होकर उन्हें भावभीनी पुष्पार्चित श्रद्धांजलि अर्पित की। संघ की प्रार्थना एवं हरिः शरणम् के बाद सर्वप्रथम झण्डा गायन हुआ–‘सेवा-त्याग-प्रेम का झण्डा ऊँचा सदा रहेगा’। तत्पश्चात् ‘प्रार्थना एवं पद’ पुस्तिका से कुछ पदों का उपस्थित जनसमुदाय ने भावविभोर होकर समवेत स्वर में गायन किया। अन्त में सर्वहितकारी कीर्तन- ‘हे हृदयेश्वर हे सर्वेश्वर’ के साथ समेकित साधकों ने समाधी स्थल की परिक्रमा की तथा संघ के नारे– ‘त्याग–प्रेम की जय हो–रोग द्वेष का नाश हो’ का जयघोष किया।

तत्पश्चात् सभी साधकवृन्द ‘सन्त कुटी’ में एकत्रित हुए। जहाँ भक्तों ने ब्रह्मलीन सन्त के पाद–पझों में गुरु–महिमा को लेकर भक्ति–पूर्ण रचनायें प्रस्तुत कीं। उससे उपरान्त श्रीमद्भगवद् गीता के द्वादश अध्याय का सामूहिक वाचन हुआ। कुछ देर ‘टेपांकित संतवाणी’ के श्रवण के उपरांत स्वामी अद्वैत चैतन्य जी एवं साध्वी अर्पिता जी ने मानव सेवा संघ के उद्दे‌‍शय पर प्रकाश डाला एवं संघ के प्रवर्तक के कुछ मार्मिक प्रसंगों का उल्लेख किया।

तत्पश्चात् सभी आगन्तुक महानुभाव एवं आश्रमवासी साधक भाई–बहन गौशाला के मुख्य द्वार पर गौपूजन हेतु एकत्रित हुए। जिसमें गायों को रोली–चन्दन–अक्षत लगाकर माला पहनाई गई एवं उन्हें गुड़ खिलाकर आरती उतारी गई। अन्त में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

दोपहर एक बजे आश्रम की भोजनशाला में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें सभी उपस्थित प्रेमीजनों ने प्रसाद ग्रहण किया।

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